क्यों बढ़ती है मुसलिम आबादी?

मुसलमानों की आबादी बाक़ी देश के मुक़ाबले तेज़ी से क्यों बढ़ रही है? क्या मुसलमान जानबूझ कर तेज़ी से अपनी आबादी बढ़ाने में जुटे हैं? क्या मुसलमान चार-चार शादियाँ कर अनगिनत बच्चे…

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माल्दा, मुसलमान और कुछ सवाल!

मुसलमानों को सोचना चाहिए और शिद्दत से सोचना चाहिए कि सुधारवादी और प्रगतिशील क़दमों का हमेशा उनके यहाँ विरोध क्यों होता है? तीन तलाक़ जैसी बुराई को आज तक क्यों…

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ऐसी दिखती है 2016 की तसवीर!

2016 में क्या-क्या बदल सकता है और क्या नहीं? ख़बरें हैं कि 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कम विदेश यात्राएँ करेंगे और चुनावी रैलियाँ भी काफ़ी कम करेंगे! इस साल…

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न्याय क्या सबके लिए बराबर है?

Salman Khan समेत तमाम बड़े मामले हमारी न्याय व्यवस्था पर गम्भीर सवाल उठाते हैं कि न्याय क्या सबके लिए बराबर है? न्यायपालिका क्या अपने भीतर झाँक कर देखेगी? क्या वह…

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यह कैसा ‘बचकाना न्याय’ है?

जनभावनाओं के उबाल के बाद जिस तरह आनन-फ़ानन में राज्यसभा में किशोर न्याय बिल पास कराया गया, उसके कई बड़े ख़तरे हैं. भावनाओं के शोर में गढ़े गये कुछ झूठों…

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क्या चाहिए आपको, लोकतंत्र या धर्म-राज्य?

आज आपको रिबेरो, एडमिरल सुशील कुमार, शाहरुख़, आमिर और 'सिकुलरों' को लताड़ना हो, लताड़ लीजिए. लेकिन जिस एजेंडे पर देश को ले जाने की कोशिश हो रही है, उसे समझिए.…

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आइएसआइएस और औंधी सुरंगें!

आइएसआइएस दुनिया को 'इसलामी ख़िलाफ़त' बनाना चाहता है. लेकिन वह ख़ुद दुनिया के ज़्यादातर मुसलमानों के ख़िलाफ़ है! क्योंकि वह उन्हें मुसलमान मानने को ही तैयार नहीं! और दुनिया के…

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कामन सिविल कोड से क्यों डरें?

हिन्दुओं ने तो ज़्यादातर सामाजिक सुधारों को स्वीकारना शुरु कर दिया, लेकिन मुसलमानों ने पर्सनल लाॅ को 'धर्म की रक्षा' का सवाल बना कर अपनी अलग पहचान और अस्तित्व का…

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अब ताप में हाथ मत तापिए!

दादरी और कानपुर की घटनाओं ने बता दिया कि पिछले नब्बे साल से संघ देश की प्रयोगशाला में चुपके-चुपके और अथक जो प्रयोग कर रहा था, उसका रसायन अब बिलकुल तैयार…

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