राजनीति बतर्ज़ मुख़्तार अन्सारी

Raagdesh Admin – January 28, 2017

विकास की बाँसुरी, फ़ासिस्ज़्म के तम्बू!

रोशनी का अँधेरा और सच की चाँदनी!

‘सिन्धु-साक्षी’ पॉवर से सुपरपॉवर!

सुविधा के अलग-अलग पैमाने!

इसके पहले चीनी सामानों के बहिष्कार का बड़ा ‘राष्ट्रवादी’ हल्ला था. लेकिन नोटबंदी के बाद ‘राष्ट्रवादी सलाह’ आने लगी कि ‘पेटीएम’ करो! पेटीएम में...

कितनी गाँठों के कितने अजगर?

हमने कुछ धारणाएँ बनायी हुईं हैं. कुछ मनगढ़न्त धारणाएँ! हम बनाम वह ‘दूसरे’ लोग! हम श्रेष्ठ, दूसरे निकृष्ट! हम मराठी, तो ‘भइया’ लोग घटिया!...

क़मर वहीद नक़वी

स्वतंत्र स्तम्भकार. पेशे के तौर पर 35 साल से पत्रकारिता में. आठ साल तक (2004-12) टीवी टुडे नेटवर्क के चार चैनलों आज तक, हेडलाइन्स टुडे, तेज़ और दिल्ली आज तक के न्यूज़ डायरेक्टर. 1980 से 1995 तक प्रिंट पत्रकारिता में रहे और इस बीच नवभारत टाइम्स, रविवार, चौथी दुनिया में वरिष्ठ पदों पर काम किया. 13-14 साल की उम्र से किसी न किसी रूप में पत्रकारिता और लेखन में सक्रियता रही.

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