अतीत में जमी जड़ें और भविष्य का पेड़!

आज जब मैं देखता हूँ तमाम सोशल नेटवर्किंग साइट्स को, तो दिल बैठता है. युवाओं की आँखों में तैरते सपनों के बजाय विक्षोभ का गर्द-ग़ुबार, आक्रोश की लपटें, तिरस्कार का…

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रोशनी का अँधेरा और सच की चाँदनी!

लालटेन दौर के बाद जब शहरों में पहली बार बिजली आयी थी, तो कमरे में 40 वाॅट का बल्ब भी आँखों को चौंधिया देता था. ऐसा लगता था कि इतनी…

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सचिन को ‘भगवान’ बनने की ज़रूरत नहीं थी!

कुछ साल पहले कुछ लोगों ने सचिन को 'एंडुलकर' घोषित कर दिया. 'एंडुलकर' यानी जिसका अन्त हो चुका है. कोई और होता तो शायद ही ऐसा सुन कर सदमे से…

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